Shravan Garg on The Teleprinter

    तुम हमें समर्थन दो, हम तुम्हें सत्ता देंगे

    तुम हमें समर्थन दो, हम तुम्हें सत्ता देंगे

    कांग्रेस और भाजपा के बीच इस समय जो कुछ भी चल रहा है उसे लेकर लोगों के मन में दो-तीन…
    दुविधा अब मनुष्य और मशीन के बीच चुनाव करने की है!

    दुविधा अब मनुष्य और मशीन के बीच चुनाव करने की है!

    एक सवाल जो अब तक पूछा नहीं गया है और जिसे संवेदनशीलता के साथ उठाया जाना चाहिए वह यह है…
    शुतुरमुर्ग बनता मीडिया और राजनेताओं का प्रशस्ति गान

    शुतुरमुर्ग बनता मीडिया और राजनेताओं का प्रशस्ति गान

    सरकार के कई मंत्री और उच्च पदाधिकारी इन दिनों हिंदी-अंग्रेज़ी के बड़े अख़बारों में नियमित रूप से आलेख लिख रहे…
    राहुल गांधी ने तो देश को एक बड़ी शर्म से बचा लिया, मैडम !

    राहुल गांधी ने तो देश को एक बड़ी शर्म से बचा लिया, मैडम !

    इस समय सारे अधिकार केंद्र सरकार के हाथों में हैं। होना भी चाहिए। परिस्थितियां ही कुछ ऐसी हैं। कब तक…
    ‘आत्मनिर्भर’ मानवीय त्रासदी के बीच उपलब्धियों का गौरव गान!

    ‘आत्मनिर्भर’ मानवीय त्रासदी के बीच उपलब्धियों का गौरव गान!

    लाखों की संख्या में जो मज़दूर इस समय गर्मी की चिलचिलाती धूप में भूख-प्यास झेलते हुए अपने घरों को लौटने…
    ‘रिस्क’ केवल नागरिक ही ले सकते हैं, सरकारें नहीं!

    ‘रिस्क’ केवल नागरिक ही ले सकते हैं, सरकारें नहीं!

    आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि लॉकडाउन खोलने को लेकर नागरिकों के मन में जैसी चिंताएँ हैं, वैसी उन लोगों के…
    ‘ये’ लौटने वाले प्रवासी मज़दूर हैं तो फिर ‘वे’आने वाले कौन हैं ?

    ‘ये’ लौटने वाले प्रवासी मज़दूर हैं तो फिर ‘वे’आने वाले कौन हैं ?

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब अपने राज्य के प्रवासी मज़दूरों के वापस लौटने के प्रति विरोध जताया था…
    पैरों के फफोलों तले आते आसमान से गिरते लाल गुलाब!

    पैरों के फफोलों तले आते आसमान से गिरते लाल गुलाब!

    हम जो कुछ भी इस समय अपने ईर्द-गिर्द घटता हुआ देख रहे हैं उसमें नया बहुत कम है, शासकों के…
    धैर्य का परीक्षण और मास्क पहनकर खुले में प्राणायाम करने की छूट?

    धैर्य का परीक्षण और मास्क पहनकर खुले में प्राणायाम करने की छूट?

    ‘लॉक डाउन’ दो सप्ताह के लिए और बढ़ गया है। खबर से किसी को कोई आश्चर्य नहीं हुआ। होना भी…
    ‘लॉकडाउन’ में क़ैद हमारे बच्चों के सपनों की दुनिया!

    ‘लॉकडाउन’ में क़ैद हमारे बच्चों के सपनों की दुनिया!

    क्या हम सोच पा रहे हैं कि हमारे घरों और पास-पड़ौस में जो छोटे-छोटे बच्चे बार-बार नज़र आ रहे हैं…
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