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किशोर-किशोरियों को दिशा देने और स्वस्थ समाज की रचना करने में मील का पत्थर साबित होगा जीवन कौशल कार्यक्रम ‘उमंग’

इंदौर, द टेलीप्रिंटर। इंदौर में शुक्रवार को स्कूल शिक्षा विभाग, UNFPA और BGMS के द्वारा जीवन कौशल कार्यक्रम ‘उमंग’ पर एक मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बीजीएमएस की निदेशक अंजली अग्रवाल, यूएनएफ़पीए के मध्यप्रदेश के सलाहकार जावेद शेख, ज्योति शिपंणकर सहित अन्य लोगों ने जीवन में जीवन कौशलों की आवश्यकता और महत्व के बारे में बताया।

कार्यशाला में अंजली अग्रवाल ने बताया कि उमंग कार्यक्रम की नींव एक तरह से वर्ष 2015 में इंदौर संभाग के 43 कस्तुरबा गांधी बालिका छात्रावास की 4200 बालिकाओं के साथ ही रखी गयी थी, जब दो वर्षों में इस कार्यक्रम से बालिकाओं में अनेक सकारात्मक बदलाव आए। इस परिणाम को देखते हुए और इस आधार पर कि जीवन कौशल शिक्षा न केवल बालिकाओं अपितु बालकों के लिए भी उतनी ही उपयोगी है, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सभी शासकीय विद्यालयों में जीवन कौशल शिक्षा कार्यक्रम प्रारम्भ करने का निश्चय किया।

रमसा (राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, म.प्र.), यूएनएफ़पीए और बीजीएमएस द्वारा कार्यक्रम के प्रभावी संचालन की रणनीति बनाई गयी और 2017 मे जीवन कौशल शिक्षा कार्यक्रम ‘उमंग’ हर जिले के विकासखंड मुख्यालय के विद्यालयों मे प्रारम्भ किया गया। इसके लिए सर्वप्रथम प्रदेश भर में कैस्केड मॉडल के तहत, मास्टर-ट्रेनर्स से विद्यालय स्तर तक शिक्षकों के सघन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। तत्पश्चात्त, विद्यालयों में कक्षा 9वी के लिए निर्मित बुनियादी मार्गदर्शिका के आधार पर सत्रों का संचालन 9वीं से 12वीं  कक्षा के विद्यार्थियों के साथ प्रारम्भ किया गया। पहले चरण मे 1886 विद्यालयों और तत्पश्चात् 9228 विद्यालयों मे कार्यक्रम का क्रियान्वन हुआ। साथ ही साथ कक्षा 10वीं  और 11वीं की मार्गदर्शिका तैयार कर प्रथम चरण के 1886 विद्यालयों में लागू किया गया। कक्षा 12वीं की मार्गदर्शिका भी इसी क्रम में तैयार की गयी। सहभागिता एवं अनुभावात्मक सीखचक्र आधारित पाठ्यक्रम में इंटरैक्टिव सत्र हैं, जो नोडल शिक्षकों द्वारा साप्ताहिक आधार पर छात्रों के साथ आयोजित किए जाते हैं।

अंजली अग्रवाल ने आगे बताया कि 10-19 वर्ष की अवस्था किशोरावस्था में शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक व सामाजिक परिवर्तन बहुत तेजी से आते हैं। इस उम्र में संभावनाएं असीम रहती है किन्तु साधन और अवसर सीमित रहते हैं। किशोरावस्था में एक तरफ कुछ कर गुजरने की चाह होती है, तो दूसरी तरफ बहुत सारी जिज्ञासाएँ होती हैं लेकिन, झिझक और जानकारी का अभाव किशोर/किशोरियों के आगे बढने में रुकावट बन जाता है। ऐसे में आवश्यकता हैं कि पढ़ाई के साथ-साथ उनमें ऐसे कौशल विकसित किए जाएँ, जो उन्हें जीवन के हर कदम पर आने वाली चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाएं।  इसी उद्देश्य से कक्षा 9वीं से 12वीं  के विद्यार्थियों के साथ जीवन कौशल शिक्षा कार्यक्रम ‘उमंग’ प्रारम्भ किया गया है। उन्होने जानकारी दी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा चिन्हित सभी दस जीवन कौशलों, क्रमशः स्वजागरुकता, समानुभूति, संवाद कौशल, अंतर्वैयक्तिक संबंध, समालोचनात्मक चिंतन, रचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान, निर्णय लेना, भावनाओं का प्रबंधन एवं तनाव प्रबंधन,  का समावेश इस पाठ्यक्रम में सुनिश्चित किया गया है।

कार्यक्रम में यूएनएफ़पीए के मध्यप्रदेश के सलाहकार जावेद शेख ने भी कार्यशाला में उद्बोधन के साथ अपने विचार साझा किए। यूएनएफ़पीए ने बीजीएमएस को एक पार्टनर रूप मे चयन किया, जबकि दोनों संस्थाएं इस कार्यक्रम से संबन्धित सभी तकनीकी, शैक्षणिक व व्यावहारिक पहलू पर साथ मिलकर इसका क्रियान्वयन में विभाग का सहयोग कर रही हैं।

कार्यक्रम के सुदृढ़ीकरण व प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से क्षेत्रीय स्तर पर निरंतर मॉनिटरिंग एवं शिक्षकों हेतु हैंड-होल्डिंग की भी अतिरिक्त व्यवस्था की गई है; इसके साथ ही एक विशेष ‘उमंग एमपी’ मोबाइल एप भी विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से विद्यालयों में सत्रों के प्रगति पर रिपोर्टिंग एवं निगरानी की जाती है। गत शैक्षणिक सत्र में प्राप्त आंकड़ों एवं फीडबैक के आधार पर,  98% प्राचार्यों के अनुसार विद्यार्थियों की जीवन कौशल शिक्षा में रुचि है; शत-प्रतिशत  शिक्षक जीवन कौशल शिक्षा को छात्रों के लिए आवश्यक मानते हैं एवं 99% विद्यार्थी इस शिक्षा को उनके लिए लाभ-दायक मानते हैं। कार्यशाला में इस कार्यक्रम से लाभान्वित बच्चों के फीडबैक भी साझा किए गए।

कार्यशाला में जानकारी दी गई कि, मार्च,2020 के उपरांत कोविड19 महामारी से संबन्धित लॉकडाउन के मध्य भी जीवन कौशल शिक्षा कार्यक्रम के अनवरत संचालन हेतु रमसा, यूएनएफ़पीए एवं बीजीएमएस ने त्वरित पहल कर कई विशेष तकनीकी व्यवस्थाएं की। मई से अक्टूबर माह तक निरंतर सभी सत्रों को वैबसाइट के माध्यम से जीवन कौशल शिक्षा पर आधारित एनीमेशन फिल्म्स के रूप में प्रतिसप्ताह बच्चों तक सफलतापूर्वक पहुंचाया गया, जिसमें वे मोबाइल फोन की मदद से भाग लेते रहे। इसके लगभग 14 लाख यू-ट्यूब व्यूज़ रहे व विद्यार्थियों से 2.58 लाख फीड बैक फॉर्म भी प्राप्त हुए।  इसके साथ ही भोपाल दूरदर्शन पर भी विशेष शैक्षणिक सत्रों को प्रसारित करने की व्यवस्था की गईं थी।

ज्योति शिपंणकर ने बताया कि अनुभवों से परिपूर्ण यह कार्यक्रम निरंतर बेहतरी की ओर बढ़ रहा है। उन्होने कई सफलता कि कहानियाँ भी साझा की जो इस बात की द्योतक हैं कि जीवन कौशल शिक्षा विद्याथियों के जीवन में नई ऊर्जा का संचार कर सकती है और जीवन के हर पहलू में आगे बढ़ने में उन्हें मदद करती है। विद्यार्थियों में जीवन कौशलों का विकास होने के साथ उनकी झिझक भी कम हुई और समय समय पर वे अपनी समस्याएँ भी साझा करने लगे हैं। इसका संज्ञान लेते हुए एक परामर्श व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गयी और अब उमंग हेल्पलाइन 14425 की भी शुरुआत की गई है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी सीधे विशेषज्ञों से शंकाओं के समाधान तुरंत पाते हैं। मध्य प्रदेश का जीवन कौशल शिक्षा कार्यक्रम एक ऐसी क्रांति हैं जो हमारी युवा पीढ़ी को दिशा देने और स्वस्थ समाज की रचना करने में मील का पत्थर साबित होगी।

बता दे कि  जीवन कौशल कार्यक्रम ‘उमंग’ शिक्षा विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के समस्त शासकीय विद्यालयों की कक्षा 9वीं से 12वी के विद्यार्थियों हेतु संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम को 2017 से प्रारम्भ किया गया एवं इसे दो चरणों में कक्षा 9वी से 12वी तक ले जाया गया।

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