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जंगली सुअरों से परेशान पहाड़ी अंचल के किसान, रात भर मशाल जलाकर कर रहे फसल की रखवाली

अनुपम दाहिया

सतना, द टेलीप्रिंटर। मध्यप्रदेश के सतना जिले के किसान इन दिनों जंगली सुअरों सहित अन्य जंगली जानवरों के आतंक से परेशान है। वनों से घिरे इन गांवों में जंगली जानवर खेतों में खड़ी फसल नष्ट कर रहे हैं। ऐसे में किसानों को दिन के साथ-साथ रातों में भी खेतों की रखवाली करना पड़ रही है। किसान रात में मशाल जलाकर अपने खेतों की रखवाली करते हैं।

दरअसल जिले के उचहेरा विकासखंड के आदिवासी बाहुल्य परसमनिया पहाड़ी अंचल में 16 पंचायत व 84 गाव हैं। यहाँ के जहाँ लोगो की आजीविका मुख्य रूप से खेती पर ही निर्भर है। लेकिन वनों से घिरे होने के कारण अक्सर जंगली सुअर खेतों में खड़ी फसल को रौंदकर व खाकर किसानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जंगली सूअर से धान फसल को बचाने के लिए किसानों के पास कोई ठोस उपाय नहीं है। ऐसे में किसानों को दिन-रात अपने खेतों की रखवाली करना पड़ रही है।

जंगली सूअर से फसल को बचाने के लिए किसानों के पास कोई ठोस उपाय नहीं है। इन जंगली सुअरों से बचने के लिए अभी तक कोई तकनीक विकसित नहीं हुई है। एक और समस्या यह भी है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत इनको मारा भी नहीं जा सकता है। अगर किसान ऐसे जानवरों को मारते है तो उनके खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में किसान जंगली सुअरों को मारने के बजाय भगाने का प्रयास करते है। इसके लिए वे खेतो में ऊंची झोपड़ी बनाकर उसी में रात गुजारते हैं। किसान रातभर जागकर खेत में आग की मशाल जलाकर या टीन की आवाज से जानवरों के झुंड को भगाते हैं। आग देखकर व तेज आवाज सुन जंगली जानवर पास नहीं आते।

वनांचल के लोगो की माने तो नीलगाय, साम्हर, चीतल सहित अन्य जानवर तो इंसानों की आवाज से डर कर भाग जाते हैं, लेकिन सुअरों को खेतों से भगाना मुश्किल हो रहा है। यह बहुत ही खतरनांक होता है, क्योंकि जंगली सुअर इंसान पर देखते ही सीधे हमला करने से भी नहीं चूकता। यहां के ग्रामीणों की माने तो जंगल से लगे क्षेत्र में खेती करना बहुत ही खतरनाक होता है। शाम होते ही जंगली सुअर, नीलगाय सहित विभिन्न शाकाहारी वन्य जीव फसलों को खाने खेतों में आ जाते हैं। तो दूसरी ओर मांसाहारी जीव इन शाकाहारी जीवों का शिकार करने जंगलों से निकल कर खेतों की ओर चले आते हैं जिनमें तेंदुआ, सियार, जंगली कुत्ते बड़ी सख्या में हैं। जिनसे किसानों को भी खतरा बना रहता है।

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