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सालों से जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ रहे बैगा आदिवासी

डिंडौरी, द टेलीप्रिंटर। मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में बैगा आदिवासी और अन्य समाज के लोग जल, जंगल और जमीन को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। आदिवासियों का आरोप है कि प्रशासन लगातार उन्हें जंगल खाली और अपने पूर्वजों की जमीन छोड़ने के लिए धमका रहा है।

दरअसल जिले के बरेंडा ग्राम में बैगा आदिवासी और अन्य समाज के कई परिवार वर्षों से जिला प्रशासन और वन विभाग से जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ रहा है। जहां एक तरफ प्रशासन आदिवासियों के दस्तावेजों को अमान्य कर जमीनों पर से इनके हक को निरस्त कर रहा हैं। वहीं बैगा आदिवासियों का कहना है कि हम अपनी जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं छोड़ेंगे। गौरतलब है कि बैगा आदिवासी कई दशकों से जंगल में खेती करके अपना जीवन यापन करते आ रहे हैं।

इन परिवारों का आरोप है कि आए दिन वन विभाग के अधिकारी उन्हें जंगल खाली करने और अपने पूर्वजों की जमीन छोड़ने के लिए धमका रहे है। यही नहीं अधिकारी उनकी फसल को मवेशियों से चरवाने के लिए आमादा है। इसके अलावा वन विभाग के अधिकारी उनके कच्चे घरों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

बरेंडा ग्राम के आदिवासी बैगाओं का कहना है कि वन विभाग के अधिकारियों की शिकायत हमने जिला प्रशासन से भी की, लेकिन जिला प्रशासन हमारी कोई मदद नहीं कर रहा है। हमने वनाधिकार पट्टा पाने के लिए जिला प्रशासन के सामने अपना दावा भी प्रस्तुत किया था लेकिन उसे प्रशासन ने यह कहकर निरस्त कर दिया कि उन्हें 75 साल का काबिज प्रमाण पत्र आवेदन में संलग्न करना पड़ेगा।

ग्रामीणों का कहना है कि पढ़ाई लिखाई से दूर अशिक्षा का जीवन जी चुके आदिवासी बैगाओं के पूर्वजो ने इतना नही सोचा था कि आने वाली पीढ़ी को भी वही लड़ाई लड़नी होंगी जो वे लड़ चुके थे। इस लड़ाई में कई ग्रामीणों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा है।

बहरहाल कई ग्रामीणों के मामले जिला न्यायालय में बीते 6 से 7 सालो से प्रकरण चल रहे है जिसकी पेशी में उन्हें आज भी जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने एक मत होकर कहा है कि भले ही उन्हें अपने जंगल की लड़ाई किसी भी स्तर पर क्यों न लड़नी पड़े लेकिन वे अपने पूर्वजों की खेती नही छोड़ेंगे चाहे इसके लिए उन्हें अपनी जान ही क्यों न देनी पड़े।

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