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कोरोना योद्धाओं के लिए खुशी का जतन

रतलाम, द टेलीप्रिंटर। विश्व प्रसिद्ध आर्ट ऑफ लिविंग संस्था द्वारा कोरोना वारियर्स के सम्मान में ऑन लाईन हैप्पीनैस कार्यक्रम निःशुल्क करवाने के लिए अभियान चलाया है। इसी तारतम्य में  शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, रतलाम, रीवा, ग्वालियर, उदयपूर के चिकित्सक चार दिक्सीय “ब्रेथ एण्ड मेडिटेशन” कार्यशाला में अपनी प्रतिभागिता दे रहे हैं। प्रतिदिन ढ़ाई घंटे चलने वाले इस सत्र में मानव की आंतरिक दुनिया से संबंधित क्रियाएँ, प्राणायाम, ध्यान, योग कराए जाते हैं।

इस कार्यशाला में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय खंण्डवा के डीन डॉ अनंत पंवार के अलावा रतलाम मेडिकल कॉलेज के बायोकेमिस्ट्री, फारेंसिक मेडिसीन और फार्मकोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ मनोज पालीवाल, डॉ मिश्रा, डॉं संजीब दास के साथ 38 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इस कार्यशाला में मनुष्य के अस्तित्व के स्तर उनकी कार्यशैली, उर्जा के विभिन्न स्रोत, प्राण उर्जा, कनिष्ठ प्राणायाम, भ्रस्त्रीका, ऊँ का महत्व, सुदर्शन क्रिया, ज्ञान की विभिन्न कुंजियाँ आदि को वृहद स्वरूप में बताया जाता है। कोर्स में यही क्रियाएं व ज्ञान जीवन जीने की कला त्यकित में विकसित कर देता है।

कोरोना वारियर्स के सम्मान में किए जा रहे इस हैप्पीनैस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को गहरी आंतरिक शांति के साथ विभिन्न नकारात्मक वृतितयों जैसे क्रोध, चिंता, डर आदि पर नियंत्रण करने की भावना भी प्रेरित होती है। विदित है कि सुदर्शन क्रिया तथा इस कोर्स पर देश-विदेश में सैकड़ों रिसर्च की गई है जिनमें लोगों के शारीरिक, मानसिक व व्यवहारिक धरातल पर विस्तृत परिवर्तन विभिन्न उपकरणों, प्रक्रियाओं के माध्यम से दर्ज किए गए हैं। कई लाईलाज बीमारियों पर भी इसके धनात्मक प्रभाव परिलक्षित हुए हैं।

ऑनलाईन चल रहे इस कार्यक्रम को डॉं लोकेन्द्रसिंह कोट तथा श्रीमती लता कोट जो कि आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षित शिक्षक हैं, सम्पन्न करवा रहे हैं। डॉं लोकेन्द्र बताते हैं कि यह कार्यक्रम अपने आप में बहुआयामी और अनोखा है इसके माध्यम से व्यक्ति की जरूरत के मुताबिक परिवर्तन महसूस किए जाते हैं। वे आगे बताते हैं कि, “हम बचपन से सुनते आए हैं कि मन लगाकर सब काम करना चाहिये लेकिन, आज तक किसी ने नहीं बताया कि यह मन लगाएँ कैसे? यह कोर्स इसी मन की विभिन्न परतों को खोलते हुए उसे साधने के गुर देता है। नकारात्मकता से दूर करता है।”

कोर्स में युवा प्रतिभागियों के साथ सभी उम्र के प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं और सभी के अनुभव अलग अलग हैं। जैसे एक प्रतिभागी बताते हैं कि कोर्स में रोज गृह कार्य भी दिया जाता है, बहुत ही रोचक प्रक्रियाओं से ज्ञान सहजता से प्राप्त होता है। मैंने एक गृह कार्य के तहत पुराने मित्र जिससे गलतफहमी की वजह से बात नहीं करता था, उससे बात की तो मुझे ही नहीं उसे भी बहुत अच्छा लगा।

इस कार्यक्रम के लिए मध्यप्रदेश के आर्ट ऑफ लिविंग के अपेक्स मेम्बर श्री शिवनारायण पाटीदार जी का सहयोग सराहनीय रहा।

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