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बालाघाट का युवा किसान बना अन्य किसानों के लिए मार्गदर्शक

बालाघाट, द टेलीप्रिंटर। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के एक किसान ने अपने पिता व चाचा के मार्गदर्शन और सूझबूझ से अन्य किसानों के सामने एक मिसाल कायम की है। यह युवा किसान फसल चक्र को अपनाते हुए भंजर भूमि पर जायद की फसलों की खेती करके हर साल लाखों रुपए कमा रहा है।

दरअसल के बालाघाट जिले के किसान पहले धान, गेहूं और मोटी अनाज की पैदावार को अपनी आय का एक मात्र जरिया मानते थे, लेकिन क्षेत्र में पानी के अच्छे स्त्रोत को देखते हुए किसान अब खरीफ व रबी की फसल के साथ जायद की फसलों की भी खेती करने लगे हैं। इससे किसान अच्छा मुनाफा कम रहे हैं।

बालाघाट जिला मुख्यालय से 18 किमी वारासिवनी तहसील के ग्राम दिनी के युवा किसान तामेश चौधरी ने अपने पिता पोतनलाल चौधरी व चाचा के मार्गदर्शन और सूझबूझ से अन्य किसानों के मार्गदर्शक बनकर उभरे हैं। तामेश फसल चक्र को अपनाते हुए साल में तीन फसलों की खेती कर रहे हैं और अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं।

तामेश चौधरी ने बताया कि दिनी से भाण्डी मार्ग पर बंजर भूमि थी जिसे साल 2011 से 2015 के मध्य में खेती को उपजाऊ बनाया गया। फिर मेरे पिता पोतनलाल चौधरी जो शासकीय कर्मी है के मार्गदर्शन के आधार से खेती को ही अपनी आय का जरीया बनाया। मुझे खेती करते-करते 2-3 साल हो गए हैं। पहले मेरे चाचा खेती करते थे। मैंने 5 एकड़ खेती में से 2 एकड़ भूमि पर लौकी, 1 एकड़ में मुंग, 1 एकड़ में बरबटी व थोड़ी भूमि पर ककड़ी लगाया गया है। उन्होंने आगे बताया कि जायद की खेती बुवाई के लिए मध्य जनवरी के लगभग लौकी की नर्सरी की जाती है।

युवा किसान तामेश ने बताया है कि लौकी की खेती के लिए दो से ढाई एकड़ में लगभग 4000 पौधे लगाये है जिसमें प्रति पौधे से औसतन 10 लौकी मिलती है। माना जाये तो औसतन 100 रूपये पर 20-23 रूपये की लागत आती है और प्रति पौधे एक एकड़ में लगभग 70 से 90 क्वीटंल लौकी का उत्पादन हो जाता है। बाजारों में भाव अच्छा मिल जाने पर 90 हजार से एक लाख रुपए का शुद्ध आय होने की सम्भावना रहती है। वह आगे बताते हैं कि प्रति एकड़ धान में 25-30 क्वीटंल, प्रति एकड़ गेहूं 18-20 क्विटंल और जायद की फसल से प्रति एकड़ 50 हजार से 80 हजार रूपये रूपये की बाजार भाव अच्छा मिल जाने से कमाई हो जाती है।

युवा किसान तामेश चौधरी ने बताया कि दुनिया में कृषि एक ऐसा धंधा है जहां से लाखों रूपये कमाया जा सकता है। इसमें अच्छी तकनिक की आवश्यकता है। कृषि विभाग विशेषज्ञों से जानकारी ले और अपनी कमाई का जरिया उन्नत कृषि को बनाए जिससे आप कभी भी नुकसान में नहीं जाओगे। युवा वर्ग अपनी खेती को छोड़कर शहर की ओर बढ़ते है किन्तु कृषि ऐसा व्यवसाय है जो खर्च कम और लाभ अधिक अर्जित किया जा सकता है। खेती ऐसी हो जिससे वर्ष भर फसल चक्र को अपने हुए वर्ष भर शुद्ध आय कमा कसते हो।

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